रिपीटर क्या है और कैसे काम करता है ?

दोस्तों आज इस आर्टिकल के माध्यम से मैं आपको हिंदी में बताऊंगा कि रिपीटर क्या है (What Is Repeater In Hindi) और रिपीटर कैसे काम करता है, दोस्तों अगर आप रिपीटर से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और इससे संबंधित सारे Doubt खत्म करना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही वेबसाइट पर आए हैं ।

मुझे आशा है कि आज आप रिपीटर से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त कर, रिपीटर को समझने और समझाने में सक्षम होंगे । तो दोस्तों रिपीटर से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त करने के लिए अंत तक इस पोस्ट पर बने रहिए ।

रिपीटर क्या है और कैसे काम करता है – What Is Repeater And How Does Works in hindi

तो दोस्तों सबसे पहले हम बात करते हैं कि रिपीटर को हम उपयोग में कहां करते हैं, तो आपको बता दें कि अगर हम कोई सिग्नल माना A पॉइंट से भेजते हैं और वह सिग्नल पॉइंट B से होते हुए, पॉइंट C तक पहुंचाना है, लेकिन वह सिग्नल पॉइंट A पॉइंट B तक ही पहुंच पाता है (क्योंकि पॉइंट B पर दूरी के कारण Signal की Strength Down  हो जाएगी और Signal Down हो जाने का मतलब है Signal Corrupt होना या Signal Loss हो जाना) और Signal Loss होने लगता है ।

अब आपको वही Loss Signal, Point C तक पहुंचाने के लिए Point B पर रिपीटर का Use करते हैं क्योंकि रिपीटर का मुख्य काम सिग्नल को Corrupt होने या Loss होने से बचाकर, सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान अर्थात काफी दूर तक पहुंचाने के लिए किया जाता है ।

What Is Repeater In Hindi

 

 

 

 

 

 

 

अर्थात  रिपीटर का मुख्य काम भेजे गए सिग्नल को, जिस सिग्नल की Strength बिल्कुल कमजोर (Weak) हो गई है, उसको दोबारा से बढ़ा देता है । मतलब कमजोर (Weak) Signal को पुनः निर्माण (Re-generate) कर देता है ।

रिपीटर किस लेयर पर काम करता है – On Which Layer Repeater Works In Hindi

दोस्तों आपको बता दे कि रिपीटर, OSI Model के Physical Layer पर काम करता है (OSI Model को 7 Layer में बांटा गया है,1. एप्लीकेशन (Application), 2. प्रेजेंटेशन (Presentation), 3. सेशन (Session), 4. ट्रांसपोर्ट (Transport) 5. फिजिकल (Physical), 6. डाटा लिंक (Data Link) 7. नेटवर्क लेयर (Network Layer) एवं यह Hardware होता है, इस लेयर का मतलब Hardware होता है ।

आपको बता दें कि Data Link Layer में MAC Address (Media Access Control Address) आता है और Network Layer में IP Address (Internet Protocol Address) आता है ।

लेकिन Repeater एक Hardware Device है, मतलब कि यह OSI मॉडल के  Physical Layer पर काम करते हैं,  इसका Data Link लेयर से कोई संबंध नहीं होता है ।

Repeater और Amplifier में क्या अंतर है – Difference Between Repeater And Amplifier In Hindi

अक्सर लोगों को Repeater और Amplifier में Doubt होता है कि Repeater और Amplifier एक Device होते है और इन दोनों एक समान काम होता है, अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं तो दोस्तों आपको बता दें कि आप गलत सोच रहे हैं । 

आपको बता दें कि Repeater और Amplifier एक ही डिवाइस नहीं होते हैं । Amplifier का मुख्य काम Signal को बहुत ज्यादा बढ़ा देना होता है । लेकिन Repeater, Low Signal को Re-generate करके वास्तविक (Original) सिग्नल में परिवर्तित कर देता है । Repeater, Signal को Amplifie करता है । और इसमें Receiver, Transmitter और Amplifier लगा होता है ।

उदाहरण- माना कोई Signal की Strength शुरुआत में X है और अगर Strength X, Down हो जाती है तो Amplifier द्वारा उसी Signal को जरूरत के हिसाब से 2 गुना, 3 गुना, या 4 गुना आदि कर सकते हैं अर्थात वास्तविक (Original) सिग्नल को बहुत ज्यादा बढ़ा सकते हैं ।

लेकिन अगर Repeater का उपयोग करते हैं तो Signal की वास्तविक (Original) Strength X है और सिग्नल Loss होकर अर्थात Signal Weak होकर X से कम बचता है तो रिपीटर उस Weak Signal  को पुनः निर्माण (Re-generate) करके X के बराबर कर देगा ।

मतलब आपको बता दें कि Signal जैसे ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है तो उसकी Strength वास्तविक (Original) सिग्नल से कम होती जाती है । तो रिपीटर उस Weak Signal को Re-generate करके वास्तविक (Original) सिग्नल में बदल देता है ।

आप कह सकते हैं कि Repeater, Weak Signal को Amplifie करता है पर Amplifier Device का Purpose अलग होता है और Repeater एवं Amplifier का उपयोग अलग अलग होता है ।

रिपीटर की विशेषताएं – Feature Of Repeater In Hindi

  1. Repeater 2 Port वाली Physical Device है जिसमें दो अलग-अलग Wires को जोड़ सकते तो यह OSI Model के Physical Layer का Network Device है ।
  2. रिपीटर द्वारा सिग्नल Forwarding होता है अर्थात Signal एक स्थान से, दूसरे स्थान पर, दूरी तक पहुंचाया जाता है अर्थात यह सिग्नल Loss होने से बचाने के लिए Weak सिग्नल को पुनः निर्माण Re-generate करता है जैसा कि ऊपर उदाहरण में समझाया गया है ।
  3. रिपीटर Filtering का काम नहीं करता है अर्थात रिपीटर को जो भी Signal मिलता है उसे वह अंत (Destination) तक पहुंचा देता है ।
  4. रिपीटर में जितनी डिवाइस लगी (Connect) होगी उतनी ही Collision में होगा, इसका मुख्य कारण यह है कि रिपीटर में Buffering नहीं होता है जो भी Signal आता है, आए हुए सभी Signal को भेजता रहता है ।

What Is Repeater

रिपीटर के क्या क्या फायदे हैं  – What Are The Benefits Of Repeater In Hindi

  1. इसका काम Weak Signal की Strength बढ़ाकर, वास्तविक (Original) सिग्नल के पुन: र्निर्माण (Re-generate) करने में किया जाता है और लंबी दूरी तक Signal को एक स्थान से, दूसरे स्थान तक पहुंचाया जाता है 
  2. यह अन्य नेटवर्क डिवाइस की तुलना में सस्ता होता है ।
  3. इसको बड़ी आसानी से स्थापित (Install) किया जा सकता है ।
  4. यह Physical लेयर पर काम करते हुए, जो भी Signal प्राप्त करता है वह अंत (Destination) तक आसानी से पहुंचा देता है ।
  5. रिपीटर को अलग-अलग Cable (Optic Fiber Cable, UTP Cable आदि ) से जोड़ा जा सकता है । जब TV में सिग्नल कम आते हैं तो Cable TV में भी रिपीटर लगाया जाता है, Mobile टावर में भी रिपीटर लगा होता है ।

रिपीटर के क्या क्या नुकसान हैं – What Are The Disadvantage Of Repeater In Hindi

  1. रिपीटर का उपयोग Heavy Network Traffic के समय नहीं किया जा सकता है ।
  2. Heavy traffic के समय Collision की समस्या भी आ जाती है ।
  3. रिपीटर का उपयोग Filtering के लिए नहीं किया जा सकता है अर्थात रिपीटर को जो भी Data मिलता है उसे वह अंत (Destination) तक पहुंचा देता है चाहे उस Data में बाहरी शोर-शराबा (External Noice) भी क्यों ना हो ।
  4. Repeater सिर्फ ब्रॉडकास्ट ही करता है । 

रिपीटर के प्रकार  – Types of repeater In Hindi

What is Repeater in Hindi

Data Transmission के आधार पर Repeater को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है-

  1. Analogue Repeater
  2. Digital Repeater

एवं काम के आधार पर रिपीटर कई प्रकार के होते हैं जैसे वाई-फाई रिपीटर, माइक्रोवेव रिपीटर, सैटेलाइट रिपीटर, LTE रिपीटर, ऑप्टिकल, टेलीफोन, रेडियो रिपीटर आदि अनेक प्रकार के रिपीटर होते हैं ।

1 . Wi-Fi repeater

दोस्तों आप में से कई लोग अपने-अपने घरों, ऑफिस आदि जगहों पर Wi-Fi का उपयोग करते हैं लेकिन जब घर या ऑफिस में किसी एक जगह Wi-Fi Device लगा होता है या आपका घर बड़ा होता है तो Wi-Fi Device से दूर, दूसरे कमरे में Net Slow चलता है । ऐसी परिस्थिति में सभी कमरों में डाटा अच्छे से चलाने के लिए Wi-Fi Repeater का उपयोग किया जाता है । वाई-फाई रिपीटर को उस जगह पर लगाया जाता है, जहां से Net का Speed कम हो जाती है इस प्रकार दूसरे कमरे तक नेट पहुंचाया जाता है ।

Wi-Fi repeater को बहुत से लोग Wi-Fi Extender या Wi-Fi Booster क्या Wi-Fi Network Booster कहते हैं ।

इसका काम Wi-Fi Signal को बढ़ाना है । Wi-Fi रिपीटर, Wi-Fi Signal को Receive करते हैं और उसी Weak Signal को Re-generate करता है यह छोटा सा Device होता है और बाजार में ₹1500 या ₹2000 में मिल जाता है । यह Portable Device है और एक जगह से दूसरी जगह पर आसानी से लगाया जा सकता है ।

  1. एल.टी.इ. रिपीटर (LTE Repeater)

इस रिपीटर का उपयोग LTE, eNB या LTE स्टेशन से प्राप्त Signal को Amplifie या Boost करने में किया जाता है । इसका मुख्य काम कमजोर सिग्नल (Weak Signal) को बढ़ा (Boost) करके, मोबाइल उपभोक्ता या दूसरे उपकरणों का उपयोग करने वाले उपभोक्ता द्वारा किया जाता है ।

  1. सैटेलाइट रिपीटर (Satellite Repeater)

जैसा कि आपको पता होगा सैटेलाइट Communication में सैटेलाइट, ट्रांसमीटर (Transmitter) एवं रिसीवर (Receiver) दोनों का कार्य करता है । सैटेलाइट हमारी भूतल से लगभग 36000 किलोमीटर ऊंचाई पर भूसमकलिक कक्षा में चक्कर लगा रहा है। सैटेलाइट में भी Repeater लगा होता है ।

  1. ऑप्टिक रिपीटर (Optical Repeater)

इसका उपयोग Optical Communication में होता है, जहां यह Electric Form में Optical Signal को Receive करता है। यहां यह Signal को Transmission करने से पहले Re-generate और Amplifie करता है ।

  1. टेलीफोन रिपीटर (Telephone Repeater)

इसका उपयोग टेलीफोन लाइन में Telephone Signal को Re-generate करने में किया जाता है ।

  1. रेडियो रिपीटर (Radio Repeater)

इसमें रेडियो रिसीवर (Radio Receiver) और रेडियो ट्रांसमीटर (Radio Transmitter) लगे होते हैं ।

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